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लेखक परिचय
लेखक का जन्म उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जनपद के एक छोटे से गाँव 'डोमा' में हुआ। प्राथमिक शिक्षा-दीक्षा गाँव में ही हुई। गाँव के ५० किमी के भीतर कोई महाविद्यालय नहीं था, इसलिये इण्टरमीडिएट की पढ़ाई के लिये उन्हें रेनुकूट आना पड़ा। तब तक लेखक की हिन्दी भाषा के प्रति सामान्य रूचि थी। परन्तु हिण्डालको इण्टरमीडिएट महाविद्यालय के हिन्दी के अध्यापक श्री जी॰ डी॰ पाण्डेय की अध्यापन शैली के कारण लेखक का हिन्दी के प्रति झुकाव पैदा हुआ। उसके पश्चात लेखक IIT की तैयारी के लिये इलाहाबाद आ गये जहाँ उन्हें मनीष वंदेमातरम् जैसे कवि मित्र मिलें। कुछ कवि सम्मेलनों में जाने का अवसर प्राप्त हुआ। कवि मित्र मनीष वंदेमातरम् और पंकज तिवारी की प्रेरणा से हिन्दी में समालोचनायें लिखकर पत्र-पत्रिकाओं को भेजने लगें। लेखक ने अपनी प्रथम कविता GLA प्रोद्यौगिकी एवम् प्रबंधन संस्थान, मथुरा में प्रवेश लेने के बाद लिखी। यहाँ पर मित्रों ने बहुत सराहना की। बहुत जल्द ही साथी मित्रों ने लेखक के हिन्दी-प्रेम का सम्मान किया और सन् २००५ में Electronics & Communication की सोसाइटी 'साइनेप्स' का प्रधान सम्पादक मनोनित किया गया। लेखक पिछले एक वर्ष से भित्ति-पत्रकारिता में सक्रिय रहें। लेखक ने कई बार अपनी कविताओं को प्रकाशनार्थ पत्रिकाओं को भी प्रेषित किया परन्तु सफलता नहीं मिली। अतः गूगल समूह 'चिट्ठाकार' के सहयोग से लेखक ने अपनी रचनायें क्रमबद्ध रूप से अपने ब्लॉग ( http://merikavitayen.blogspot.com/ ) पर अप्रील २००६ से प्रकाशित करना शुरू कर दिया। जल्द ही लेखक ने 'हिन्दी कविता ( http://groups.google.com/group/hindikavita?lnk=gschg) नामक गूगल समूह का निर्माण किया जिसमें वर्तमान में १३० सदस्य हैं। लेखक संस्थान स्तरीय सांस्कृतिक कार्यक्रमों में अपनी कवितायें सुनाते रहते हैं। वर्तमान में लेखक नौकरी की खोज में दिल्ली आ चुके हैं। नये-पुराने अर्थपूर्ण गीत-संगीत सुनने में खास रूचि है। किसी समय फिल्म देखने के शौकीन हुआ करते थे, परन्तु अब समय नहीं निकाल पाते हैं। भविष्य में एक स्वयम् सेवी संघ की स्थापना करना चाहते हैं जो कि ग्रामिणों में शिक्षा के प्रति जागरूकता फैलाने का काम करेगी।
रचनायें- लेखक मूल रूप से आधुनिक कवितायें ही लिखते हैं। 'आधा, आधा होता है' नामक इक कहानी लिख चुके हैं। 'असली जीत' नाम से लेखक ने एक नाटक लिखा जिसके माध्यम से बीबीसी हिन्दी के एक कार्यक्रम 'उभरते नाटककार प्रतियोगिता' में सम्मिलित हो सकें। महाविद्यालय के सांस्कृतिक कार्यक्रम के लिये लेखक ने 'भारतीय नर्क' नामक एक नाटिका की रचना की। वर्तमान में वे उपन्यास-लेखन कर रहे हैं।
 
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